Friday, November 9, 2012

आजका भारत- श्रीरामकी जुबानी

कह गए रामचन्द्र सिया से
एक दिन ऐसा आएगा,
पैसा बोलेगा अपना भाव,
इन्सान भावहीन हो जायेगा।

बिकने लगेंगे हवा-पानी,
ईमान और ज़मीर भी बिक जायेगा,
हो जायेगा अंधेर जहाँ
रक्षक ही भक्षक बन जायेगा।

न रहेंगे मान-मर्यादा कहीं,
समय भयंकर आएगा,
होंगे दुशासन गली गली
संस्कारोका चीर हरण हो जायेगा।

लालच होगा इतना मन में
जो भ्रष्टाचार करवाएगा,
बिन 'मलाई' न होगा कोई काम,
भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार कहलायेगा।

होगी महंगाई इतनी की
जिसको न सहा जायेगा,
अमीर होंगे और अमीर,
गरीब और गरीब बन जायेगा।

उठेगी अगर कोई सच्ची आवाज़
तो उसको दबा दिया जायेगा,
चोर बने होंगे कोतवाल,
निर्दोषको दंड दिया जायेगा।

धर्म-जाति के नाम पर लोगोंमें
दंगा-फ़साद हो जायेगा,
भाई करेगा भाई का खून,
ऐसा भी वक़्त आएगा।

भ्रष्टाचार, अशिक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई
इन सबका पारा ऊपर चढ़ता जायेगा,
होंगे रावण इतने की
सिर्फ एक राम कम पड़ जायेगा।


-
राज रिन्दानी

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